Thursday, August 7, 2008

वो मिली तो जिंदगी हयात हुई

गुमसुम से हैं आप आज क्या बात हुई।
इस सुनहरी सुबह में क्यूं धुधली रात हुई।।

ऊपर वाले को भी तनहाई न रास आई तो।
जरा जरा करके हम इंसानों की कायनात हुई।।

इक मुददत तक तडपता रहा इंतजार में मैं।
रुह निकली तो उनसे मुलाकात हुई।।

जिंदगी नर्क थी जब तक न मिली थी उसे।
वो मिली तो जिंदगी हयात हुई।।

कतरा कतरा जीने में क्या रखा है।
ऐसे जीयो कि जिंदगी हर रोज बारात हुई।।

मांगते मांगते जुबान मे पड गए छाले।
अपना हक आज वो खैरात हुई।।

10 comments:

Udan Tashtari said...

वाह! बहुत उम्दा,बधाई.

राज भाटिय़ा said...

इक मुददत तक तडपता रहा इंतजार में मैं।
रुह निकली तो उनसे मुलाकात हुई।।
क्या बात हे, बहुत ही सुन्दर,धन्यवाद

seema gupta said...

जिंदगी नर्क थी जब तक न मिली थी उसे।
वो मिली तो जिंदगी हयात हुई।।
"wonderful, beautiful sher" liked reading it.
Regards

बालकिशन said...

बेहतरीन....
बहुत ही उम्दा... रचना.
गजल की आपकी कैसे तारीफ़ करूँ
लगता है जैसे जज्बातों की बरसात हुई.

(^oo^) bad girl (^oo^) said...

Very good......

swati said...

sundar abhivyakti....

शहरोज़ said...

भाई, आप बहुत ही लगन से सार्थकता के शिखर पर हैं.सफलता तो कई हैं पर सार्थक एकाध ही नज़र आते हैं.कई बार सोचा इधर आऊं लेकिन शहर दिल्ली कि व्यस्त फिर ब्लॉग का नया-नया-चस्का आज आखिर पहुच ही गया.
अफ़सोस हुआ, हाय हँसा हम न हुए की तर्ज़ पर कि हाय पहले क्यों न आया.
कई पोस्ट देखी.तेवर वही पर अंदाज़ और कंटेंट में जुदागाना असर.
हमारा भी ठिकाना है, जहां और भी भूले-भटके आ जाते हैं.गर आप आयें तो ख़ुशी ही होगी .
लिंक है
http://hamzabaan.blogspot.com/
http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

रंजन राजन said...

गुमसुम से हैं आप आज क्या बात हुई।
उम्दा, धन्यवाद

poemsnpuja said...

इक मुददत तक तडपता रहा इंतजार में मैं।
रुह निकली तो उनसे मुलाकात हुई।।

waah...amazing...behtarin...bas kya kahun

विक्रांत बेशर्मा said...

इक मुददत तक तडपता रहा इंतजार में मैं।
रुह निकली तो उनसे मुलाकात हुई।।

जिंदगी नर्क थी जब तक न मिली थी उसे।
वो मिली तो जिंदगी हयात हुई।।

कमल कर दिया साहब आपने....बहुत अच्छी रचना है !!!!!!!!!!!!!!!!